जिस्म पर लिखा राम-राम, सांसों में बसी भक्ति:सांस्कृतिक संसद में सुनाई आस्था और संघर्ष की कहानी, अध्यक्ष बोले- अब लोग रामनाम लिखवाने से बच रहे

माथे से लेकर पैरों तक राम-राम। कपड़ों पर राम, शॉल पर राम, टोपी पर राम। घर की दीवारों और दरवाजों पर भी राम नाम की छाप। यह सिर्फ आस्था नहीं, सदियों पुराने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ खड़ा हुआ एक ऐसा विश्वास है, जो आज भी सांसों में बसा है। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की। एक ऐसा समाज, जिसने मंदिर के दरवाजे बंद होने प...
वाराणसी / नई दिल्ली: माथे से लेकर पैरों तक राम-राम। कपड़ों पर राम, शॉल पर राम, टोपी पर राम। घर की दीवारों और दरवाजों पर भी राम नाम की छाप। यह सिर्फ आस्था नहीं, सदियों पुराने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ खड़ा हुआ एक ऐसा विश्वास है, जो आज भी सांसों में बसा है। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की। एक ऐसा समाज, जिसने मंदिर के दरवाजे बंद होने प...
Dharm & Aastha अनुभाग से जुड़े इस प्रमुख घटनाक्रम पर संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का सीधा असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। मामले से जुड़े प्रमुख हितधारकों और जानकारों से प्रतिक्रियाएं ली जा रही हैं। इस संबंध में जैसे ही कोई नई आधिकारिक घोषणा या रिपोर्ट सामने आएगी, विस्तृत जानकारी तुरंत साझा की जाएगी।
(ख़बर और ताज़ा अपडेट के लिए News Varanasi के साथ बने रहें। स्रोत: Bhaskar)