दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर सुबह-सवेरे उमड़ रही फिटनेस फ्रीक्स की भीड़, योग और जुम्बा ने बदली युवाओं की मॉर्निंग रूटीन
गंगा के तट पर होने वाले योगाभ्यास और फिटनेस सेशंस ने काशी के युवाओं की सुबह की दिनचर्या में नया जोश भर दिया है। प्राचीन परंपरा और आधुनिक फिटनेस का यह अनूठा संगम पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
वाराणसी की सुबह जितनी आध्यात्मिक होती है, अब उतनी ही ऊर्जावान भी होती जा रही है। सूर्योदय के समय दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट और अस्सी घाट की सीढ़ियों पर केवल मंत्रोच्चार ही नहीं सुनाई देता, बल्कि फिटनेस के प्रति जागरूक युवाओं की टोलियां योगासन, प्राणायाम और ओपन-एयर जुम्बा वर्कआउट करती नजर आती हैं। शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर, गंगा की ठंडी बयार और बहते पानी के बीच शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को साधना आज के युवाओं की पहली पसंद बन गया है।
स्थानीय फिटनेस कोचों द्वारा इन घाटों पर निशुल्क या न्यूनतम शुल्क पर मॉर्निंग फिटनेस कैंप चलाए जा रहे हैं, जिसमें बीएचयू के छात्र, स्थानीय व्यापारी और शहर में आए पर्यटक बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इन सत्रों में पारंपरिक भारतीय योग आसनों के साथ-साथ कार्डियो और मेडिटेशन का भी समावेश किया जाता है, जो मानसिक शांति और शारीरिक मजबूती दोनों प्रदान करता है।
घाट पर योग साधना करने वाली एक युवा छात्रा ने साझा किया, 'गंगा किनारे योग करने से जो ऊर्जा मिलती है, वह किसी जिम के बंद कमरे में नहीं मिल सकती। यह हमारी प्राचीन संस्कृति और आधुनिक फिटनेस का सबसे खूबसूरत मेल है।' जिला प्रशासन भी घाटों पर आने वाले इन फिटनेस समूहों को प्रोत्साहित कर रहा है ताकि काशी को स्वस्थ और ऊर्जावान शहर के रूप में और अधिक प्रमोट किया जा सके।