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काशी में बदल रहा खान-पान का अंदाज: BHU और सिगरा के कैफे में बढ़ रहा सात्विक और ऑर्गेनिक मिलेट्स फूड का क्रेज

October 28, 2026, 01:49 AM News Varanasi Bureau 10 hours ago
काशी में बदल रहा खान-पान का अंदाज: BHU और सिगरा के कैफे में बढ़ रहा सात्विक और ऑर्गेनिक मिलेट्स फूड का क्रेज

धर्म और अध्यात्म की नगरी वाराणसी में अब खान-पान की जीवनशैली में एक स्वस्थ बदलाव देखने को मिल रहा है। बीएचयू और सिगरा क्षेत्र के युवा और पर्यटक पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ मिलेट्स (श्री अन्न) आधारित आधुनिक डिशेज़ को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वाराणसी सिर्फ अपनी भव्य गंगा आरती और मंदिरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी लजीज चाट, कचौरी और बाटी-चोखा के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में शहर के युवा वर्ग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के बीच जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है। बीएचयू (Banaras Hindu University) परिसर के आसपास और सिगरा के मॉर्डन कैफे में रागी, बाजरा, ज्वार और सामा के चावल से बने फ्यूजन फूड मेनू का हिस्सा बन चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'श्री अन्न' (Millet) को बढ़ावा दिए जाने के बाद से काशी के शेफ और रेस्टोरेंट संचालक भी पारंपरिक मसालों के साथ बाजरे की कुकीज़, मिलेट पिज्जा और मल्टीग्रेन कचौरी जैसे विकल्प तैयार कर रहे हैं। पर्यटकों के बीच भी इन सात्विक और पौष्टिक व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ी है। खासकर विदेशी पर्यटक जो काशी की यात्रा पर आते हैं, वे योग और अध्याفت के साथ-साथ इस ऑर्गेनिक डाइट को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।

सिगरा के एक प्रसिद्ध कैफे के संचालक ने बताया, 'हमारे यहां आने वाले 40 फीसदी ग्राहक अब ग्लूटेन-फ्री और ऑर्गेनिक फूड की मांग करते हैं। हमने बनारसी ठंडाई और कचौरी के साथ-साथ मिलेट बेस्ड डेजर्ट्स भी शुरू किए हैं, जिन्हें काफी पसंद किया जा रहा है।' यह बदलाव यह साबित करता है कि काशी अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजते हुए आधुनिक और स्वास्थ्य-केंद्रित जीवनशैली को भी उतनी ही सहजता से अपना रही है।

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